प्रकाश जावड़ेकर जी, इनकी भी सुनिए...

- नौनिहालों के उज्जवल भविष्य के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकी पर शिक्षाविद, अध्यापक, अभिवावक, सिविल सोसायटी, स्कूल संचालक करा रहे हैं राय दर्ज
- शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सेक्टर्स की मांग को आवाज देने एक मंच पर आए सिविल सोसायटी संगठन

 देश की शिक्षा व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त करने और इसमें आमूल चूल परिवर्तन करने के उद्देश्य से केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा नई शिक्षा नीति निर्धारित की जा रही है। नई शिक्षा नीति की महत्ता को देखते हुए सरकार द्वारा आम जन को इसमें भागीदार बनाने की भी पूरी कोशिश की जा रही है। इस बाबत गठित टीएसआर सुब्रह्मनियन कमेटी द्वारा ड्राफ्ट तैयार करने के बाद मंत्रालय लोगों से ईमेल के द्वारा सुझाव आमंत्रित कर रहा है। फिर भी लोग अपने नौनिहालों के उज्जवल भविष्य के लिए हर उपलब्ध मंच पर बिंदास रूप से अपनी राय दर्ज कराने से नहीं चूक रहे। उन्हें अास है कि किसी न किसी मंच से उनकी बात मंत्री जी तक पहुंच जाए और उनके बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा मिलने का सपना पूरा हो सके।

लोगों के इस सपने को सच करने और उनकी राय को आवाज देने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत नागरिक संगठन उनकी मदद करने को आगे आए हैं। देश के अग्रणी थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) के नेतृत्व में स्कूल संचालकों, शिक्षाविदों, अध्यापकों व अन्य गैर सरकारी संगठनों ने एनईपी गठबंधन का गठन किया है। इस गठबंधन ने शिक्षा के क्षेत्र से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तरीके से जुड़े सेक्टर्स सहित हर आम-ओ-खास की राय पारदर्शी तरीके से जुटाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया है। एनईपी-विकी नामक इस प्लेटफार्म की खास बात यह है कि इच्छुक व्यक्ति न केवल यहां अपनी राय दर्ज कर सकते हैं बल्कि उपलब्ध राय में फेरबदल भी कर सकते हैं। इसके अलावा दूसरों के द्वारा दर्ज कराए गए सुझाव को आगे बढ़ाते हुए उसमें अपनी राय जोड़ भी सकते हैं। एनईपी गठबंधन के संयोजक व सीसीएस के एसोसिएट डाइरेक्टर अमित चंद्र के मुताबिक मंच पर दर्ज होने वाले सभी सुझावों को संकलित कर रिपोर्ट मानव संसाधन मंत्रालय को भेजी जाएगी।

अमित के मुताबिक सरकार द्वारा लिए जा रहे सुझावों और गठबंधन द्वारा की जा रही रायशुमारी में एक बड़ा अंतर पारदर्शिता का है। www.nep.ccs.in एक सार्वजनिक प्लेटफार्म हैं जहां हर कोई दूसरे की राय और सुझाव को न केवल देख सकता है बल्कि उसपर चर्चा परिचर्चा भी कर सकता है।
थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट डा. पार्थ जे. शाह के अनुसार सरकारी नीतियों के निर्माण के दौरान का संभवतः यह पहला मामला है जहां नागरिक संगठनों व शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े अथवा रूचि रखने वाले विभिन्न सेक्टर्स एक साथ आकर रायशुमारी करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सूचना एवं संचार क्रांति के दौर में ऑनलाइन प्लेटफार्म का प्रयोग पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को बढ़ावा देता है। असल मायने में यही लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। उन्होंने उम्मीद जताई की मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर रायशुमारी की इस प्रक्रिया को पसंद करेंगे और प्रोत्साहित करेंगे।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रो. गीता गांधी किंगडन के अनुसार एनईपी-विकी एक जबरदस्त विचार है और इससे नीति निर्माण की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और सुदृढ़ किया जा सकेगा। सभी सेक्टर्स के लोगों को इससे जुड़ना चाहिए और दशकों बाद तैयार हो रही नई शिक्षा नीति में अपनी भागीदारी दर्ज करानी चाहिए।

ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ टीचर्स ऑर्गनाइजेशन (एआईएफटीओ) के महासचिव सीएल रोज़ का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में नीतियां बनाते समय अध्यापकों की राय की हमेशा अनदेखी होती है। आम तौर पर यह मान्यता है कि अध्यापक सुधारों का विरोध करेंगे। जबकि एनईपी-विकी अध्यापकों व इससे जुड़े वास्तविक लोगों की राय व चिंताओं को सार्वजनिक मंच पर लाने का काम कर रहा है। सभी सरकारी व निजी स्कूलों में अध्यापनरत शिक्षकों को इस मंच का प्रयोग कर अपने सुझाव अवश्य दर्ज कराना चाहिए। 

एसोसिएटेड मैनेजमेंट्स ऑफ प्राइवेट अनऐडेड स्कूल्स इन कर्नाटका के महासचिव डी. शशिकुमार का कहना है कि एनईपी गठबंधन के इस प्रयोग से हम सभी रोमांचित हैं। सरकारी नीतियों के निर्माण में ऐसे व्यवहारिक मंच का इस्तेमाल इससे पहले शायद ही कभी हुआ हो। इस मौके का भरपूर लाभ उठाते हुए हम सभी को खुलकर अपने विचार इस मंच पर दर्ज कराना चाहिए।

- आजादी.मी

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