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Friday, December 06, 2013

किसी का उत्पीड़न करना नागरिकों के लिए गैरकानूनी होता है, लेकिन सरकार के लिए यह कार्य पूर्णतया कानूनी हो जाता है

- थॉमस जेफरसन

Monday, December 02, 2013

व्यक्ति बनाम सरकार

Friday, November 15, 2013

"लेकिन हम सभी मुक्त अर्थव्यवस्था की ईच्छा रखते हैं... न केवल इसलिए कि यह हमारी स्वतंत्रता की गारंटी है, बल्कि इसलिए भी कि यह धन के सृजन का और पूरे देश को संपन्न बनाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है...।"

- मार्ग्रेट थैचर (1925-3013)

Thursday, November 14, 2013

"बहुत संभव है कि कोई गलत चयन करे है या बुरे निर्णय ले, लेकिन आजादी के तहत ऐसी गलतिया होने देनी चाहिए"

- सांग क्यू शिन

Wednesday, November 13, 2013

"मुक्त बाजार पूंजीवाद, मुक्त और स्वेच्छा से किए जाने वाले विनिमय (आदान प्रदान) का एक ऐसा संजाल (नेटवर्क) है, जिसमें उत्पादक कार्य करते हैं, उत्पादन करते हैं और स्वैच्छिक रूप से तय हुई कीमत पर अपने अपने उत्पादों का एक दूसरे के साथ परस्पर विनिमय करते हैं..।"

- मर्रे रॉथबार्ड

Monday, November 11, 2013

पूंजीवाद के साथ जुड़ी 'बुरी' बात ये है कि इसमें 'फायदे' का असमान वितरण होता है, साम्यवाद के साथ जुड़ी बुरी बात ये है कि इसमें 'मुफलिसी' का समान वितरण होता है...

- विन्सटन चर्चिल

Friday, November 08, 2013
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पंखा न चलाए, तो मच्छर काटते हैं और चलाते हैं, तो ठंड लगती है

वह पहले प्यार में धोखा खाई लड़की की तरह अंदर अंदर घुटता है, मगर किसी को कुछ बताता नहीं है

 

आम आदमी को रत्तीभर भी परवाह नहीं कि साठ साल पहले जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल फेसबुक पर फ्रेंड थे या नहीं? उसे यह भी फिक्र नहीं है कि साढ़े चार करोड़ किलोमीटर की यात्रा पर निकले मंगलयान का रास्ते में अगर पेट्रोल खत्म हो गया, तो वह कहां से भरवाएगा? न ये सोचकर उसका खून सूखा जा रहा है कि रिवर्स रेपो रेट में चौथाई...

Friday, November 08, 2013

यदि कोई पानी की बजाए शराब पीता है तो मैं नहीं कह सकता कि वह बेवकूफी भरी हरकत कर रहा है। ज्यादा से ज्यादा मैं ये कह सकता हूं कि यदि मैं उसकी जगह होता तो ऐसा नहीं करता। लेकिन उसे किस बात से खुशी मिलती है यह ढूंढना उसका काम है, न कि मेरा...

- लुडविग वॉन माइसेस

Thursday, November 07, 2013

यदि इतिहास हमें कोई सबक सिखा सकता है तो वह यह है कि सभ्यता और निजी संपत्ति के बीच अभिन्न संबंध रहा है.. लुडविग वोन माइसेस

Monday, October 07, 2013
"सागर में समाकर अपनी पहचान खो बैठने वाली पानी की बूंद से इतर, मनुष्य समाज में रहकर भी अपनी पहचान नहीं खोता है।
मानव जीवन स्वतंत्र होता है। मनुष्य का जन्म केवल समाज की उन्नति के लिए नहीं बल्कि स्वयं की उन्नति के लिए होता है..."
 
- डा. भीमराव अंबेडकर

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