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Wednesday, January 13, 2010

सूचना का अधिकार (आरटीआइ) कानून का उद्देश्य प्रशासनिक और सरकारी जवाबदेही को सुनिश्चित करना रहा है, और अगर लोकतंत्र का कोई अंग इससे अछूता रहता तो इससे इस कानून का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आता था।

लेकिन आरटीआइ से जुड़ा एक ऐतिहासिक फैसला दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया है, जिसके बाद...

Friday, January 08, 2010

अगर इरादे बुलंद हैं तो आप अपनी जिंदगी बदल सकते हैं. ऐसा ही कुछ गुड़गांव के निकट स्थित ताजनगर गांव के लोगों की जिजीविषा के बारे में भी कहा जा सकता है। जिन्होंने लगभग तीन दशक पहले पैदा हुई इच्छा को आज पूरा कर दिखाया है। ताजनगर रेलवे स्टेशन (रेलवे अधिकारी इसे हॉल्ट कह रहे हैं) को यहां के स्थानीय लोगों ने...

Wednesday, January 06, 2010

कुछ लोग कभी-कभी ऐसा मानते हैं कि बढ़ती जनसंख्या का दबाव भारत जैसे विकासशील देश के लिए अभिशाप है। दिल्ली पुलिस के सबसे बड़े अफसर पुलिस कमिश्नर युद्धवीर सिंह ढढवाल ने भी पिछले हफ्ते दिल्ली की बढ़ती जनसंख्या को बढ़ते अपराध का कारण माना...

Thursday, December 31, 2009

देश के किसी भी हिस्से में अपराध नई बात नहीं है। असुरक्षा हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। देश के ऐसे कई शहर हैं जहां घर में ताला लगा कर आप किसी काम से गए नहीं कि ताला अब टूटा, तब टूटा, सोने की चेन या मंगल-सूत्र खींचने के लिए बाइक पर नौजवान बेधड़क घूम...

Monday, December 28, 2009

सारी कवायद मात्र सत्ता पर आसीन होने के लिए है। जब एकमात्र उद्देश्य सत्ता पर काबिज होना हो तो सब चलता है, कोई भी अस्पृश्य नहीं रह जाता। कुछ ऐसा ही नजारा उस समय देखने को मिला जब 23 दिसंबर को झारखंड विधानसभा चुनाव नतीजे आए।

जनता ने किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। बस फिर क्या था, सत्ता...

Thursday, December 24, 2009

दिल्ली के हर किसी ट्रैफिक सिग्नल पर यह रोज के नजारे हैं। बस या कार लाल बत्ती पर रुकती है तभी खिड़की के शीशे पर दस्तक होती है। कोई अपाहिज, दीन-हीन बुजुर्ग महिला या कोई फटेहाल बच्चा हाथ फैलाता नजर आ जाता है। बात चाहे दिल्ली गेट चौक...

Friday, December 18, 2009

सबसे  अहम होता है जीने का अधिकार, फिर चाहे वह एक आम आदमी हो या फिर जेल या थाने में बंद कोई अपराधी ही क्यों न हो। उसके मानवाधिकार पर प्रहार सभ्य समाज के लिए सबसे दुखदायी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी कानून-व्यवस्था में कुछ ऐसी...

Tuesday, December 15, 2009

जैसा होता आया है, वैसा ही हुआ। एक जिद्दी बच्चे की जिद पूरी हो जाए तो बाकी बच्चे भी उसकी देखा-देखी में जिद करने लगते हैं और फिर बात हाथ से बाहर हो जाती है।

ऐसा ही कुछ इन दिनों तेलंगाना के मामले में भी हुआ। अलग तेलंगाना...

Friday, December 11, 2009

सुबह के साढ़े नौ बजे, दिल्ली का कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन भीड़ के समुद्र से पटा पड़ा है। कुछ युवा, इनमें से कुछ प्रेमी और कुछ अमूमन खाली बिरादरी के लोग यहां-वहां सीढ़ियों पर डेरा डाले बैठे हैं।

जाहिर है, ये भागमभाग...

Friday, December 04, 2009

वह 3 दिसंबर, 1984 की काली स्याह रात थी, जब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लोग गहरी नींद में सो रहे थे। इस बात से बेखबर की शायद ही वह सुबह का सूरज देख सकेंगे और बड़ी ही खामोशी के साथ मौत की नींद सो जाएंगे। यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ। जिसकी मुख्य वजह टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का...

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