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Monday, November 16, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा कर रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्रत्येक किसी विशेष मुद्दे पर किस तरह लागू होता है, इस संबंध में हमारी राय अलग-अलग हो सकती है, पर ये सिद्धांत अपने आप में स्थापित सत्य हैं। इन्हें मैंने नहीं बनाया है। बल्कि मैंने इन्हें सिर्फ एक जगह इकट्ठा किया है। ऐसा नहीं है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ सिर्फ ये ही हैं या सिर्फ यही सत्य है, लेकिन ये एक संतुलित और सम्यक विचार जरूर प्रस्तुत करते हैं। मेरा विश्वास है कि सरकार की प्रत्येक संरचना में बैठे...
Thursday, October 29, 2015

स्कूली शिक्षा को लेकर हरियाणा सरकार के मन में सम्मान की भावना बिल्कुल नहीं है, और ना ही यह नई शिक्षा नीति को लेकर गंभीर है। निजी स्कूलों की फेडरेशन लगभग दो महीने से शिक्षा का अधिकार (आरटीई) व 134ए की गलत नीतियों के खिलाफ जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन और हड़ताल कर रही है किंतु राज्य सरकार को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ऐसा सुनने में आ रहा है कि नई शिक्षा नीति के बाबत विभिन्न राज्यों द्वारा प्राप्त अनुशंसाओं को लेकर आगामी 31 अक्टूबर को उत्तर भारतीय राज्यों की एक बैठक बुलाई गई है। किंतु हमें खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि इस नई शिक्षा नीति के...

Tuesday, February 17, 2015
जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्रत्येक किसी विशेष मुद्दे पर किस तरह लागू होता है, इस संबंध में हमारी राय अलग-अलग हो सकती है, पर ये सिद्धांत अपने आप में स्थापित सत्य हैं। इन्हें मैंने नहीं बनाया है। बल्कि मैंने इन्हें सिर्फ एक जगह इकट्ठा किया है। ऐसा नहीं है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ सिर्फ ये ही हैं या सिर्फ यही सत्य है, लेकिन ये एक संतुलित और सम्यक विचार जरूर प्रस्तुत करते हैं।...
Thursday, February 12, 2015
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जिस "स्वस्थ्य सरकारी नीति के सात सिद्धांतों'' की हम यहाँ चर्चा करने जा रहे हैं, वे मुक्त अर्थव्यवस्था के आधार स्तंभ हैं। उनमें से प्रत्येक किसी विशेष मुद्दे पर किस तरह लागू होता है, इस संबंध में हमारी राय अलग-अलग हो सकती है, पर ये सिद्धांत अपने आप में स्थापित सत्य हैं। इन्हें मैंने नहीं बनाया है। बल्कि मैंने इन्हें सिर्फ एक जगह इकट्ठा किया है। ऐसा नहीं है कि मुक्त अर्थ व्यवस्था के आधार स्तंभ सिर्फ ये ही हैं या सिर्फ यही सत्य है, लेकिन ये एक संतुलित और सम्यक विचार जरूर प्रस्तुत करते हैं। मेरा विश्वास है कि सरकार की प्रत्येक संरचना में...
Monday, February 02, 2015
गरीबी उन्मूलन का मुद्दा दुनियाभर की सभी साम्यवादी व समाजवादी सरकारों की प्राथमिकता में होती है। दूरदर्शिता व अच्छी नीति अपनाने की बजाए वे अपनी 'अच्छी' नियत का हवाला देती हैं। अपने आप को लोक कल्याणकारी सरकार घोषित करने के चक्कर में सरकारें अक्सर गरीबों का नुकसान करने लगती हैं। आम तौर पर सरकारें गरीबी उन्मूलन के लिए मुफ्त भोजन, मुफ्त आवास, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं आदि आदि प्रदान करना शुरू कर देती हैं। इनमें से अधिकांश योजनाएं या तो फंड के आभाव में दम तोड़ देती हैं या फिर जनता पर नए कर आरोपित करने का कारण बनती है। इसके अलावा...
Friday, January 30, 2015

सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। यह लोगों को कहीं का नहीं छोड़ता है और उन्हें उपक्रमण से वंचित करता है। यह लोगों को स्वावलंबी होने के गुणों का नाश करता है। जाहिर तौर पर, सरकार की बढ़ती शक्तियां मुझे भयभीत करती है। भले ही यह लोगों को शोषित होने से बचाकर यह अच्छा काम करती है, लेकिन व्यैक्तिकता (निजी), जो कि सभी उन्नतियों के हृदय में वास करती है, को...

Wednesday, January 28, 2015
- पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी द्वारा टॉप ग्लोबल थिंकटैंक सेंटर्स की सूची जारी, टॉप 50 में अकेला भारतीय
 
-  चीन, भारत, जापान और कोरिया के 50 टॉप थिंकटैंक सेंटर्स की सूची में 14वां स्थान
 
नई दिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त थिंकटैंक सेंटर सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) के ताज में एक और नगीना जुड़ गया...
Monday, January 19, 2015
समाजवाद के 6 चमत्कार
 
1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
3- पैसे सभी को मिलते हैं, लेकिन इस पैसे से खरीदने के लिए कुछ भी नहीं होता
4- कोई कुछ नहीं खरीद...
Tuesday, January 13, 2015
गरीब पड़ोसी की बजाए अमीर पड़ोसी का होना हमेशा अच्छा होता है। लेकिन भारत और चीन के कम ही अर्थशास्त्री इस सिद्धांत से इत्तेफाक रखते हैं। आश्चर्यजनक ढंग से दोनों देश एक दूसरे की प्रगति को लेकर संशय की भावना रखते हैं। दोनों देशों को चाहिए कि एक दूसरे की प्रगति को सकारात्मक ढंग से लें और उसका हिस्सा बनें। उपरोक्त विचार एटलस इकोनॉमिक रिसर्च फाउंडेंशन के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. टॉम जी. पॉमर ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश यदि एक दूसरे की प्रगति में सहयोग कर उसका हिस्सा बनते हैं तो दोनों देशों की जनता भी फायदे में रहेगी।
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Friday, January 09, 2015
राजस्थान के छोटे से गांव का राजुराम । बड़ी मुश्किल से अपनी पढाई पूरी की और बीएड करने के लिए जब पेसो का बंदोबस्त नहीं हुआ तो बुढे पिता ने अपना खेत बेच कर पेसो का इंतजाम किया । इस आस में कि सरकारी नोकरी लग जायेगी तो परिवार को दो जून की रोटी नसीब हो जायेगी । लेकिन बदकिस्मती से खूब कोशिस करने के बावजूद भी नोकरी नहीं मिल पाई । तब तक विवाह भी हो गया और दो लडकिया और एक लड़का भी हो गया ।
 
बेरोजगारी का दंश झेलते राजुराम की पत्नी ने बच्चों का एक...

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