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Thursday, September 29, 2016
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- पॉलिसी रिव्यू कमेटी का गठन कर बजट प्राइवेट स्कूलों के समक्ष उत्पन्न होने वाली कई समस्याओं का करेंगे समाधान
- दिल्ली के निजी स्कूलों ने अव्यवहारिक ‘लैंड नॉर्म्स’ के कारण पैदा हुई समस्याओं से उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कराया था अवगत

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने माना है कि स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए निश्चित क्षेत्रफल वाले जमीन की अनिवार्यता अनेक समस्याओं का कारण बन रही है। उन्होंने स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के लिए जमीन की बजाए कमरों की उपलब्धता को प्राथमिकता देने की बात से...

Thursday, September 08, 2016
बड़े व्यापारिक घराने उच्च मजदूरी दर (न्यूनतम मजदूरी की दर बढ़ाने) के लिए लॉबिंग करते हैं, ताकि छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस बढ़े भार को सहन न कर सकें और समाप्त हो जाएं.. इस प्रकार, बड़े प्रतिष्ठानों के राह से प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है..
Thursday, August 04, 2016

सहभागितापूर्ण लोकतंत्र के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न संगठनों को एक मंच के नीचे लाकर 'एनईपी गठबंधन' तैयार किया है। गठबंधन का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के बाबत व्यापक विचार विमर्श करना है। इस उद्देश्य को अमली जामा पहनाते हुए एनईपी गठबंधन द्वारा ऑनलाइन विचारमंच (विकी) www.nep.ccs.in लांच किया गया है। इस विचारमंच पर कोई भी आम-ओ-खास शिक्षा और शिक्षा के बाबत बनने वाली नीतियों पर अपने विचार प्रकट कर सकता है। इस विचारमंच को तैयार...

Monday, August 01, 2016

जन्मदिन विशेषः "सही लोगों का चयन करना अच्छी बात है, लेकिन समस्याओं का समाधान इतने से ही नहीं होता। समस्याओं का समाधान गलत व्यक्ति के लिए सही कार्य करने को राजनैतिक ढंग से लाभकारी बनाने से होता है..: मिल्टन फ्रीडमैन"

Tuesday, July 26, 2016

आजादी के पूर्व से ही देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार में बजट प्राइवेट स्कूल्स अर्थात लो फी प्राइवेट स्कूल्स का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। समय समय पर इन स्कूलों से निकली विभूतियों ने व्यापार, खेल, राजनीति सहित तमाम क्षेत्रों में अपने झंडे गाड़े हैं। अफोर्डिब्लिटी और क्वालिटी एजुकेशन के कारण ही आज बजट प्राइवेट स्कूल्स सरकारी स्कूलों के विकल्प के रूप में उभरे हैं। न केवल नौकरी पेशा मध्यम वर्ग बल्कि मेहनत मजदूरी करने वाला निम्न आय वर्ग भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बीपीएस का रूख कर रहे हैं। इस बात की तस्दीक समय समय पर सरकारी और...

Tuesday, May 17, 2016

समाजवाद के 6 चमत्कार

1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
3- पैसे सभी को मिलते हैं, लेकिन इस पैसे से खरीदने के लिए कुछ भी नहीं होता
4- कोई कुछ नहीं खरीद सकता, लेकिन सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है
5- सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है, लेकिन कोई संतुष्ट नहीं होता
6- कोई संतुष्ट नहीं होता, लेकिन 99% लोग सिस्टम के लिए मतदान करते हैं

Monday, May 09, 2016
सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक परेशानी होती हैः एफ.ए. हायक (नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री)
Monday, May 02, 2016

- शिक्षा का अधिकार कानून ही बन रहा शिक्षा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा
- आरटीई के दोषपूर्ण उपनियमों के कारण 1 लाख से अधिक स्कूलों पर तालाबंदी का खतरा, 2 करोड़ से  ज्यादा छात्रों का भविष्य दाव पर

गैर सहायता प्राप्त (अनएडेड) निजी स्कूलों की अखिल भारतीय संस्था नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलाएंस (नीसा) ने शिक्षा का अधिकार कानून की तमाम विसंगतियों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी मुहीम छेड़ने की योजना बनाई है। योजना की शुरूआत चंडीगढ़ से होगी जहां देशभर से जुटे स्कूल एसोसिएशन्स और स्कूल संचालक तीन दिनों...

Thursday, April 21, 2016
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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरकारें भी इस दिशा में प्रयासरत हैं। ऐसे में प्रशिक्षुओं को बेहतर विकल्प और संस्थानों के चुनाव की स्वतंत्रता देने की मांग भी उठ रही है। इसी आवश्यकता को देखते हुए सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने एक टूलकिट तैयार किया है जिससे प्रशिक्षुओं को इंस्टिट्यूट चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी और प्रशिक्षण संस्थानों पर भी बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा।
सीसीएस के एसोसिएट डायरेक्टर गौरव अरोड़ा ने बताया कि महाराष्ट्र में तीन...

Tuesday, March 08, 2016

रूस में पैदा हुई विख्यात अमेरिकी उपन्यासकार, दार्शनिक, नाटककार व 'द फाउंटेनहेड (1943)', 'एटलस श्रग्ड (1957)' आदि जैसे बेस्ट सेलर की रचइता 'आयन रैंड' [2 फरवरी 1905 - 6 मार्च, 1982] की कल अर्थात 2 फरवरी को 111वां जन्मदिवस था। उनके एक प्रसिद्ध कथन को याद करते हुए इस महान उदारवादी चिंतक को हमारी श्रद्धांजलि..
"साम्यवाद और समाजवाद दोनों का अंतिम लक्ष्य एक ही है, इंसान को अपना दास बनाना। फिर भी उनके बीच एक फर्क भी है। साम्यवाद इंसान को ताकत के बल पर दास बनाता है जबकि समाजवाद उसे वोट के बल पर। यह फर्क महज उतना ही है जितना कि हत्या और आत्महत्या...

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