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कितने आश्चर्य की बात है कि जो लोग सोचतें हैं कि वे डॉक्टर, अस्पताल और दवाईयों का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं, वे ही लोग ये सोचतें हैं कि वे डॉक्टर, अस्पताल, दवाईयां और इसकी देखरेख के लिए सरकारी अफसरशाही के खर्च को वहन कर सकते हैं..
- थॉमस सोवेल
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- 'चार' और 'पद्मिनी माय लव' को सर्वश्रेष्ठ डॉक्युमेंट्री अवार्ड, तिची गोश्ता व सिल्वर गांधी को भी मिली सराहना
- विजेता डॉक्यूमेंट्री निर्माताओं का काठमांडू में होगा सम्मान
 

बच्चा पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा है; तुम क्या करोगे? तुम तत्काल डर जाओगे--हो सकता है कि वह गिर जाए, हो सकता है वह अपना पैर तोड़ ले, या कुछ गलत हो जाए। और तुम्हारे भय से तुम भागते हो और बच्चे को रोक लेते हो। यदि तुमने जाना होता कि पेड़ पर चढ़ने में कितना आनंद आता है, तुमने बच्चे की मदद की होती ताकि बच्चा पेड़ पर चढ़ना सीख जाता! और यदि तुम डरते नहीं हो तो उसकी मदद करो, जाओ और उसे सिखाओ। तुम भी उसके साथ चढ़ो!

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"यदि आप ऐसे राजनेताओं को वोट देते आ रहे हैं जो आपको मुफ्त (दूसरों के खर्च पर) चीजें देने का वादा करते हैं, तब जब वे आपके पैसे से स्वयं सहित दूसरों को चीजें बांटते हैं, आपके पास शिकायत करने का अधिकार नहीं रह जाता है"

- थॉमस सोवेल

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विगत कुछ समय से पंजाब में ड्रग्स के सेवन करने वालों की संख्या में हुई वृद्धि ने शासन प्रशासन सहित स्थानीय जनता के माथे पर चिंता की लकीरें पैदा कर दी है। तमाम प्रयासों के बावजूद वहां ड्रग्स का सेवन करने वालों की संख्या में कमी नहीं आ पायी है। यहां तक कि देशभर में पिछली कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल खड़ा करने में सफल रही भारतीय जनता पार्टी को पंजाब में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। यह घटना बताने के लिए काफी थी कि लोगों के लिए यह मुद्दा कितना महत्वपूर्ण था।

जिन लोगों को ये लगता हो कि किसानों की समस्या का एकमात्र समाधान सब्सिडी है, तो उन्हें न्यूजीलैंड देश से कुछ सबक सीखना चाहिए..। न्यूजीलैंड एकमात्र देश है जो दुनिया का एकमात्र विकसित देश है जहां कृषि कार्य के लिए कोई सब्सिडी नहीं दी जाती है। वास्तव में, कृषि क्षेत्र से सब्सिडी हटाने के बाद वहां इस क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति  हुई। आज न्यूजीलैंड द्वारा विश्व को किए जाने वाले कुल निर्यात में दो तिहाई हिस्सा कृषि उत्पादों का है..

- स्टूडेंट्स फॉर लिबर्टी

शिक्षा का अधिकार कानून के तहत आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फेल नहीं किया जा सकता है. ऐसे में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हालत इतनी खराब है कि जब वही बच्चे नौवीं कक्षा में पहुंचते हैं, तो उनमें से 50 फीसदी फेल हो जाते हैंः आजतक
 

यदि मनुष्य की नैसर्गिक प्रवृत्ति (स्वभाव) इतनी बुरी है कि उसे आजाद छोड़ना सुरक्षित नहीं तो ऐसी सोच रखने वाले या ऐसी व्यवस्था करने वालों की प्रवृत्ति हमेशा सही ही कैसे हो सकती है? क्या विधायिका (सरकार) में शामिल और उनके द्वारा नियुक्त लोग मानव जाति से संबंध नहीं रखते हैं? या फिर उन्हें लगता है कि अन्य लोगों की तुलना में वे उच्च कोटि (गुणवत्ता) की मिट्टी से बने हुए हैं???

- फ्रेडरिक बास्तियात

इतिहास गवाह है कि दुनिया भर की सरकारों द्वारा जिस भी चीज के खिलाफ मुहिम छेड़ी गई उस चीज में उतनी ही बढ़ोत्तरी हुई। सरकारों ने भूख, गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, नशा, आतंकवाद जिसके खिलाफ भी युद्ध छेड़ा दुनिया में उक्त चीजों में कमी आने की बजाए वृद्धि ही हुई है। आशा है कि सरकार आने वाले समय में धन के खिलाफ युद्ध छेड़े ताकि देश में धन की मात्रा में वृद्धि हो..