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Wednesday, December 08, 2010

गरीब की रोटी का एक बड़ा सहारा राशन की दुकान भी होती है पर यह एक ऐसी सरकारी व्यवस्था है जो सिर्फ हाथी के दांतों की तरह दिखावटी है. जिस तरह हांथी के दांतों पर बाहुबलियों का कब्जा रहता है ठीक उसी तरह इस योजना पर भी डंडा तंत्र का कब्जा है. बुंदेलखंड में छतरपुर जिले का  किशनगढ़  इलाका आदिवासी  बाहुल्य है. इस क्षेत्र में आदिवासियों के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जाता है इसकी बानगी देखने को मिली. यहाँ की सुकुवाहा ग्राम पंचायत में 70 फीसदी आदिवासी व 30 फीसदी हरिजन हैं. 1200 की आबादी वाले इस गाँव में लोगों को...

Tuesday, December 07, 2010

हम लोग अंतर्विरोधों की एक नयी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं. राजनीति में हम एक व्यक्ति-एक वोट के सिद्धांत को स्वीकार करेंगे. पर हमारे सामाजिक-राजनीतिक जीवन में, मौजूदा सामाजिक-आर्थिक ढांचे के चलते हम लोग एक लोग- एक मूल्य के सिद्धांत को हमेशा खारिज करेंगे. कितने दिनों तक हम अंतर्विरोधों का यह जीवन जी सकते हैं? विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष सुखदेव थोरात द्वारा लिखी किताब ‘दलित्स इन इंडिया सर्च फ़ॉर ए कॉमन डेस्टिनी’ बदलते दलित जीवन पर निगाह डालती है और निष्कर्ष देती है कि विगत साठ सालों की तब्दीलियों के चलते...

Friday, December 03, 2010

खुलासों की दुनिया में सबसे मशहूर नाम विकीलीक्स ने फिर कुछ सनसनीखेज दस्तावेज़ जारी कर के अमेरिका, पाकिस्तान सहित और देशों की नींद उदा दी है. हालिया खुलासों में, विकीलीक्स ने विभिन्न देशों के साथ हुए अमेरिका के राजनयिक पत्राचार और विदेश विभाग द्वारा विदेशी राजनयिकों पर नजर रखने के निर्देशों से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों को अपनी वेबसाइट पर जारी कर दिया है। जारी हुए करीब  2 लाख 50 हजार दस्तावेजों में विकीलीक्स ने बहुत सारी पोलें खोली हैं जिसकी वजह से इस वेबसाइट के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की जा रही है....

Wednesday, December 01, 2010

नया करने वाला हर व्यक्ति किसी आदर्श व्यक्तित्व का स्वामी, किसी उच्च चेतना और नैतिकता का वाहक नहीं होता। वे तो बस अपने ज़रिये अपने समय को बेलाग-बेलौस अभिव्यक्त कर रहे होते हैं। पुराने ढाँचे में नए की अभिव्यक्ति सहज सरल रूप से ही हो जाय यह हमेशा सम्भव नहीं होता। नया अक्सर वह पुराने ढाँचे को ढहा कर, उस की बाँस-बल्लियां हिला कर ही पैदा होता है। और इसीलिए वह अवैध और अनैतिक बताया जाता है। सोशल नेटवर्क में भी मूल सवाल यही है- मार्क ज़करबर्ग क्या एक अपराधी है? क्या उसने झूठ बोला है, चोरी की है, धोखा दिया है?

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Tuesday, November 30, 2010

म्यांमार की लोकतंत्र समर्थक नेता और सालों से राजनैतिक बंदी रही औंग सान सू ची की हाल ही में हुई रिहाई मानवाधिकार की एक बड़ी जीत है. पिछले 15 सालों  से नज़रबंद रही 65 वर्षीय सू ची ने पूरा जीवन म्यांमार में लोकतंत्र की बहाली के लिए लगा दिया. ख़ुशी की बात ये रही कि उनकी रिहाई म्यांमार में पिछले दो दशकों में पहली बार हुए लोकतांत्रिक चुनाव के ठीक एक हफ्ते बाद की  गई. म्यांमार के सैन्य शासकों से अन्य राजनैतिक बंदियों को रिहा करने की अपील की गयी है जिस से लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक बल मिलेगा.

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Saturday, November 27, 2010

देश में इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर बवाल मचा है। संचार मंत्री ए. राजा को 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पद से जाना पड़ा। कॉमनवेल्थ गेम्स में घोटाले को लेकर कुछ लोगों की गिरफ्तारियां तक हो चुकी हैं। मुंबई की आदर्श सोसायटी के मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की कुर्सी छिन गई। इन मुद्दों पर संसद कुश्ती का अखाड़ा बनी हुई है। कर्नाटक में मुख्यमंत्री येदुरप्पा को मुख्यमंत्री के बजाय भू माफिया की संज्ञा दी जा रही है।

भ्रष्टाचार को लेकर देश के प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा,...

Tuesday, November 16, 2010

पिछले 10-15 सालों में भारत में आउटसोर्सिंग उद्योग ने बहुत प्रगति की है. आउटसोर्सिंग से ना सिर्फ लाखो लोगो को रोज़गार मिला, देश की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) को भी इसकी वजह से एक बड़ा उछाल मिला. विश्व के बड़े और विकसित देश आज भारत सरीखे कई अन्य विकाशील देशों से अपने काम सस्ती दरों पर कराते हैं. सस्ती जगहों में अपना काम आउटसोर्स करने के कई फायदे हैं. अव्वल तो इन देशों को कम दरों पर काम करने वाले पर काबिल कर्मचारी मिल जाते हैं. खासतौर पर भारत में काम करने लायक युवा जनता ना सिर्फ अच्छी अंगेजी बोलना जानती है, वो कंप्यूटर...

Thursday, November 11, 2010

देश में लगभग 6 करोड़ लोग हैं जो नियमित इंटरनेट का उपयोग करते हैं. देश की कुल जनसंख्या के लिहाज से यह संख्या कुछ खास नहीं है लेकिन संसाधनों की उपलब्धता को देखें तो यह संख्या कम भी नहीं है. छह करोड़ लोगों की इस संख्या में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोत्तरी भी हो रही है. ऐसे समय में ब्लॉग का जन्म और प्रसार वैकल्पिक मीडिया की तलाश में लगे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.

कुछ लोगों की मेहनत, समझ और सूझबूझ का परिणाम है कि यह तकनीकी रूप से लगातार और अधिक सक्षम और कारगर होता जा रहा है.

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