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देश के किसी भी हिस्से में अपराध नई बात नहीं है। असुरक्षा हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गई है। देश के ऐसे कई शहर हैं जहां घर में ताला लगा कर आप किसी काम से गए नहीं कि ताला अब टूटा, तब टूटा, सोने की चेन या मंगल-सूत्र खींचने के लिए बाइक पर नौजवान बेधड़क घूम रह

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सारी कवायद मात्र सत्ता पर आसीन होने के लिए है। जब एकमात्र उद्देश्य सत्ता पर काबिज होना हो तो सब चलता है, कोई भी अस्पृश्य नहीं रह जाता। कुछ ऐसा ही नजारा उस समय देखने को मिला जब 23 दिसंबर को झारखंड विधानसभा चुनाव नतीजे आए।

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दिल्ली के हर किसी ट्रैफिक सिग्नल पर यह रोज के नजारे हैं। बस या कार लाल बत्ती पर रुकती है तभी खिड़की के शीशे पर दस्तक होती है। कोई अपाहिज, दीन-हीन बुजुर्ग महिला या कोई फटेहाल बच्चा हाथ फैलाता नजर आ जाता है। बात चाहे दिल्ली गेट चौक,

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सबसे  अहम होता है जीने का अधिकार, फिर चाहे वह एक आम आदमी हो या फिर जेल या थाने में बंद कोई अपराधी ही क्यों न हो। उसके मानवाधिकार पर प्रहार सभ्य समाज के लिए सबसे दुखदायी है। ऐसा इसलिए क्योंकि हमारी कानून-व्यवस्था में कुछ ऐसी ख

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जैसा होता आया है, वैसा ही हुआ। एक जिद्दी बच्चे की जिद पूरी हो जाए तो बाकी बच्चे भी उसकी देखा-देखी में जिद करने लगते हैं और फिर बात हाथ से बाहर हो जाती है।

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सुबह के साढ़े नौ बजे, दिल्ली का कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन भीड़ के समुद्र से पटा पड़ा है। कुछ युवा, इनमें से कुछ प्रेमी और कुछ अमूमन खाली बिरादरी के लोग यहां-वहां सीढ़ियों पर डेरा डाले बैठे हैं।

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वह 3 दिसंबर, 1984 की काली स्याह रात थी, जब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लोग गहरी नींद में सो रहे थे। इस बात से बेखबर की शायद ही वह सुबह का सूरज देख सकेंगे और बड़ी ही खामोशी के साथ मौत की नींद सो जाएंगे। यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ। जिसकी मुख्य वजह टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का पान

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एफ.डी. पर ब्याज के पेटे मिला वकील को चैक।

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भारत एक बार फिर सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में है। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार इस सूची में भारत का 84वां स्थान है। विश्व के सबसे भ्रष्ट और सबसे ईमानदार देशों से जुड़ी इस सालाना रिपोर्ट को 17 नवंबर के बर्लिन में जारी किया गया। पेश है भ्रष्टाचार के कारणों और परिणामों की विवेचना:

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मौत से जूझते हुए एक रोगी को  इसलिए अस्पताल के भीतर  इलाज के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया क्योंकि उस परिसर में हो रहे एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री आए हुए थे। 3 नवंबर 2009 को प्रधानमंत्री की सुरक्षा के नाम पर 32 वर्षीय सुमित  वर्मा  की चंडीगढ़ के पीजीआइ अस्पताल के दरवाजे पर ही मौत हो गई।

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