Blogs

सुबह के साढ़े नौ बजे, दिल्ली का कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन भीड़ के समुद्र से पटा पड़ा है। कुछ युवा, इनमें से कुछ प्रेमी और कुछ अमूमन खाली बिरादरी के लोग यहां-वहां सीढ़ियों पर डेरा डाले बैठे हैं।

Category: 

वह 3 दिसंबर, 1984 की काली स्याह रात थी, जब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के लोग गहरी नींद में सो रहे थे। इस बात से बेखबर की शायद ही वह सुबह का सूरज देख सकेंगे और बड़ी ही खामोशी के साथ मौत की नींद सो जाएंगे। यूनियन कार्बाइड की फैक्टरी से मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ। जिसकी मुख्य वजह टैंक नंबर 610 में जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का पान

Category: 

एफ.डी. पर ब्याज के पेटे मिला वकील को चैक।

Category: 

भारत एक बार फिर सबसे भ्रष्ट देशों की सूची में है। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार इस सूची में भारत का 84वां स्थान है। विश्व के सबसे भ्रष्ट और सबसे ईमानदार देशों से जुड़ी इस सालाना रिपोर्ट को 17 नवंबर के बर्लिन में जारी किया गया। पेश है भ्रष्टाचार के कारणों और परिणामों की विवेचना:

Category: 

मौत से जूझते हुए एक रोगी को  इसलिए अस्पताल के भीतर  इलाज के लिए अंदर नहीं जाने दिया गया क्योंकि उस परिसर में हो रहे एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री आए हुए थे। 3 नवंबर 2009 को प्रधानमंत्री की सुरक्षा के नाम पर 32 वर्षीय सुमित  वर्मा  की चंडीगढ़ के पीजीआइ अस्पताल के दरवाजे पर ही मौत हो गई।

शिशु मृत्यु दर एक संवेदनशील मामला है. यह किसी भी देश की चिकित्सा व्यवस्था और सरकार की अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेही पर सवाल उठाता है.

ब्रिटेन के संगठन "सेव दि चिल्ड्रन" ने पिछले हफ्ते यह कह कर समूचे देश को सकते में डाल दिया है कि दुनियाभर में असमय काल का ग्रास बनने वाले बच्चों में 20 फीसदी हिस्सा भारतीय मासूमों का होता है.

पिछले एकाध माह में उत्तर प्रदेश में दलितों के साथ जो कुछ हुआ वह विचारणीय है. बीते अगस्त के आखिरी हफ्ते में मऊ जिले में एक दलित की 23 वर्षीय बेटी का ऑपरेशन थिएटर में बलात्कार कर दिया गया. इससे पहले फर्रुखाबाद जिले में एक दलित महिला का डॉक्टर ने चैकअप करने से इनकार कर दिया था. प्रशासन का मानना है कि उसने अपना काम कर दिया.

भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा के लिए एक नए कानून का मसौदा (Whistleblower draft law) तैयार है. लेकिन बताया जा रहा है मंत्रीगण इससे मुक्त हैं...

हर दफ्तर में काम करने वाले अमूमन सभी लोग जानते हैं कि उन्हें किसकी बात कितनी सुननी है, कितना काम करना है, कब काम करना है और किसका काम करना है. अपने मामले में प्राकृतिक न्याय की हर कोई अपेक्षा करता है, लेकिन किसी दूसरे के साथ वह न्याय करें या न करें यह उनकी मर्जी या जरूरत से तय होता है.

सच का सामनाप्राइम टाइम में निगाहें स्टार प्लस के प्रोग्राम “सच का सामना” पर गड़ी हैं.

Pages