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Tuesday, January 09, 2018

मैं पैरेंट नहीं हूँ, लेकिन मेरे पैरेंट्स ने यह सुनिश्चित किया कि मेरे साथ गलत न हो!
मैं पैरेंट नहीं हूँ,
न अभी,
और न ही इससे पहले कभी!
यह एक विनती है, अथवा एक उम्मीद भी!
और सम्भतः अंतिम नहीं है.....
मैं भी एक बच्चा रह चुका हूँ, अपेक्षाकृत निश्चिंत बच्चा,
परेशानी क्या होती कभी नहीं जाना!

कभी यह पता नहीं चला कि असल में क्या चल रहा था,
आज मैं जो हूँ, मुझे वह बनाने के लिए
...

Friday, January 05, 2018

ध्यान हो तो धन भी सुंदर है। ध्यानी के पास धन होगा, तो जगत का हित ही होगा, कल्याण ही होगा। क्योंकि धन ऊर्जा है। धन शक्ति है। धन बहुत कुछ कर सकता है। मैं धन विरोधी नहीं हूं। मैं उन लोगों में नहीं, जो समझाते हैं कि धन से बचो। भागो धन से। वे कायरता की बातें करते हैं। मैं कहता हूं जियो धन में, लेकिन ध्यान का विस्मरण न हो। ध्यान भीतर रहे, धन बाहर। फिर कोई चिंता नहीं है। तब तुम कमल जैसे रहोगे, पानी में रहोगे और पानी तुम्हें छुएगा भी नहीं।

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Friday, November 17, 2017

अमेरिकी अर्थशास्त्री थॉमस सॉवेल के अनुसार, देश में आम चुनावों के लिए मतदान इनकम टैक्स जमा करने की अंतिम तिथि (अमेरिका के संदर्भ में 15 अप्रैल) के दूसरे दिन कराना चाहिए। यह उन गिने चुने तरीकों में से एक होगा जो सरकारों को अत्यधिक खर्चीला होने के प्रति हतोत्साहित करेगा..

Wednesday, November 01, 2017
एक खबरः भारत में व्यापार करना हुआ आसान बीबीसी हिंदी द्वारा इस मुद्दे पर प्रकाशित कार्टून असंगठित क्षेत्र के व्यवसायियों के साथ जारी ज्यादतियों को बेहद ही प्रभावी ढंग से व्याख्या करता है.. साभारः बीबीसी हिंदी
Tuesday, October 31, 2017
"यह भारत के नागरिकों के प्रति प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है कि इस आजाद देश में उनकी आजादी की रक्षा करें!" - सरदार वल्लभ भाई पटेल (भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री) साभारः http://www.santabanta.com/picture-sms/author/sardar-patel/?parent=hindi-...
Thursday, October 12, 2017

- सरकार व शिक्षा विभाग पर स्कूलों के साथ भेदभाव का आरोप, प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख मामले से कराया अवगत
- देशभर के 60,000 से अधिक स्कूलों के शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया विरोध

नई दिल्ली। स्कूल संचालन और प्रबंधन के कार्य में दिन प्रतिदिन बढ़ते सरकारी हस्तक्षेप, नए-नए नियम कानूनों के नाम पर होने वाले भेदभाव, स्कूल संचालकों व कर्मचारियों के शोषण...

Tuesday, October 10, 2017

"हम अर्थशास्त्री ज्यादा तो नहीं जानते, लेकिन हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि किसी वस्तु का अभाव कैसे पैदा किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आप टमाटर की कमी पैदा करना चाहते हैं तो सिर्फ एक ऐसा कानून बना दीजिए जिसके तहत कोई भी खुदरा व्यापारी टमाटर की कीमत 20 रूपए प्रति किलो की दर से अधिक नहीं वसूल सकेगा। तत्काल ही टमाटर की कमी पैदा हो जाएगा। ठीक ऐसी ही स्थिति तेल और गैस के साथ है।"
- मिल्टन फ्रीडमैन

Thursday, October 05, 2017

सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। यह लोगों को कहीं का नहीं छोड़ता है और उन्हें उपक्रमण से वंचित करता है। यह लोगों को स्वावलंबी होने के गुणों का नाश करता है। जाहिर तौर पर, सरकार की बढ़ती शक्तियां मुझे भयभीत करती है। भले ही यह लोगों को शोषित होने से बचाकर यह अच्छा काम करती है, लेकिन व्यैक्तिकता (निजी), जो कि सभी उन्नतियों के हृदय में वास करती है, को नष्ट कर यह मानवता को भीषण हानि पहुंचाती है.. :...

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