अविनाश चंद्रा's blog

कोई और, किसी और के धन को उतना ध्यानपूर्वक खर्च नहीं करता जितना कि 'वह' स्वयं। कोई और, किसी और के संसाधनों को उतना ध्यानपूर्वक प्रयोग नहीं करता जितना कि 'वह' स्वयं। अतः यदि आप 'दक्षता' और 'कारगर तरीके' की उम्मीद करते हैं, और यदि आप चाहते हैं कि ज्ञान का सदुपयोग हो, तो आपको संपत्ति के निजी तरीके को अपनाना ही होगा.. 
 
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एक सरकार जो इतनी समर्थ हो कि आप जो चाहें आपको दे सके तो जान लें कि वह इतनी समर्थ भी होगी कि आपके पास जो कुछ भी है उसे छीन सके...

- थॉमस जेफरसन
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यह जितना उत्साहजनक है कि अब सीबीआइ को भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे नौकरशाहों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने के लिए सरकारी मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा वहीं यह उतना ही निराशाजनक कि इसे उचित ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ को आगे आना पड़ा।

मुझे नहीं लगता कि यह कहना अतिश्योक्ति होगा कि हमारा इतिहास, महंगाई और मुद्रा स्फीति का इतिहास रहा है। वह मुद्रा स्फीति जिसका सृजन आम तौर पर सरकार द्वारा सरकार के फायदे के लिए किया गया..
 
- फ्रैडरिक ऑगस्ट वॉन हायक  
जब तक सरकारें सीमित नहीं होंगी, जनता को सही मायने में स्वतंत्रता प्राप्त नहीं हो सकती...
 
- रोनॉल्ड रीगन (पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति)
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दुनिया में अल्पकालीन सरकारी कार्यक्रमों जितनी स्थायी चीज कुछ और नहीं हो सकती...
- मिल्टन फ्रीडमैन
 
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व्यवसाय में सरकारी "सहायता" उतना ही त्रासदीपूर्ण है जितना कि सरकारी "उत्पीड़न"...सरकार केवल एक ही तरीके से राष्ट्र की समृद्धि में अपना योगदान दे सकती है, और वह है स्वयं को इससे दूर रखना।
 
- आयन रैंड

निर्धन लोगों के साथ असल त्रासदी, दरअसल उनकी आकांक्षाओं की विपन्नता है ः एडम स्मिथ

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सरकार परेशानियों से निजात नहीं दिलाती है, यह परेशानियों को रियायत देती है।

- रोनाल्ड रीगन

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जब कानून, लोगों को अपने हिसाब से जीने के अधिकार से वंचित रखता है तब व्यक्ति के पास कानून तोड़ने के अतिरिक्त और कोई विकल्प नहीं रह जाता है...
 
- नेल्सन मंडेला

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