अविनाश चंद्रा's blog

सरकारी नियंत्रण फर्जीवाड़े़ और काला बाजारी को बढ़ावा देता है। यह सत्य का दमन करता है और वस्तुओं की गहन कृत्रिम कमी पैदा करता है। यह लोगों को कहीं का नहीं छोड़ता है और उन्हें उपक्रमण से वंचित करता है। यह लोगों को स्वावलंबी होने के गुणों का नाश करता है। जाहिर तौर पर, सरकार की बढ़ती शक्तियां मुझे भयभीत करती है। भले ही यह लोगों को शोषित होने से बचाकर यह अच्छा काम करती है, लेकिन व्यैक्तिकता (निजी), जो कि सभी उन्नतियों के हृदय में वास करती है,&

समाजवाद के 6 चमत्कार
 
1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं 
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
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राजस्थान के छोटे से गांव का राजुराम । बड़ी मुश्किल से अपनी पढाई पूरी की और बीएड करने के लिए जब पेसो का बंदोबस्त नहीं हुआ तो बुढे पिता ने अपना खेत बेच कर पेसो का इंतजाम किया । इस आस में कि सरकारी नोकरी लग जायेगी तो परिवार को दो जून की रोटी नसीब हो जायेगी । लेकिन बदकिस्मती से खूब कोशिस करने के बावजूद भी नोकरी नहीं मिल पाई । तब तक विवाह भी हो गया और दो लडकिया और एक लड़का भी हो गया ।
 
कितने आश्चर्य की बात है कि जो लोग सोचतें हैं कि वे डॉक्टर, अस्पताल और दवाईयों का खर्च वहन नहीं कर सकते हैं, वे ही लोग ये सोचतें हैं कि वे डॉक्टर, अस्पताल, दवाईयां और इसकी देखरेख के लिए सरकारी अफसरशाही के खर्च को वहन कर सकते हैं..
- थॉमस सोवेल
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