अविनाश चंद्रा's blog

- शिक्षा का अधिकार कानून ही बन रहा शिक्षा की राह का सबसे बड़ा रोड़ा
- आरटीई के दोषपूर्ण उपनियमों के कारण 1 लाख से अधिक स्कूलों पर तालाबंदी का खतरा, 2 करोड़ से  ज्यादा छात्रों का भविष्य दाव पर

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देशभर में युवा सशक्तिकरण का अभियान पूरी लगन से जारी है। न सिर्फ केंद्र बल्कि राज्य सरकारें भी इस दिशा में प्रयासरत हैं। ऐसे में प्रशिक्षुओं को बेहतर विकल्प और संस्थानों के चुनाव की स्वतंत्रता देने की मांग भी उठ रही है। इसी आवश्यकता को देखते हुए सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने एक टूलकिट तैयार किया है जिससे प्रशिक्षुओं को इंस्टिट्यूट चुनने की स्वतंत्रता मिलेगी और प्रशिक्षण संस्थानों पर भी बेहतर प्रदर्शन का दबाव रहेगा।

रूस में पैदा हुई विख्यात अमेरिकी उपन्यासकार, दार्शनिक, नाटककार व 'द फाउंटेनहेड (1943)', 'एटलस श्रग्ड (1957)' आदि जैसे बेस्ट सेलर की रचइता 'आयन रैंड' [2 फरवरी 1905 - 6 मार्च, 1982] की कल अर्थात 2 फरवरी को 111वां जन्मदिवस था। उनके एक प्रसिद्ध कथन को याद करते हुए इस महान उदारवादी चिंतक को हमारी श्रद्धांजलि..

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निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से लागू किया गया शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) ही विद्यार्थियों की शिक्षा के राह का रोड़ा बन रहा है। आरोप है कि आरटीई के कुछ दोषपूर्ण उपनियमों के कारण देशभर के करीब एक लाख से अधिक छोटे स्कूल बंदी के कगार पर जा पहुंचे हैं। ऐसे स्कूलों की संख्या करीब 300 है, जो जमीन की अनिवार्यता के चलते 31 मार्च के बाद बंद हो जाएंगे। ऐसे में परेशान स्कूलप्रबंधक 24 फरवरी को जंतर-मंतर पर एकत्र होंगे। इस दौरान वे प्रधानमंत्री से स्कूलों की मान्यता के मामले में गुजरात मॉडल को देशभर मे लागू करने की मांग क

रायपुर. शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) की मदद से ज्यादातर बच्चों को सरकारी स्कूलों में लाने की योजना फेल साबित हुई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने पिछले साल दाखिले की प्रक्रिया बदली थी। इसके तहत पहले सरकारी स्कूलों में फिर अनुदान प्राप्त व आखिर में प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिया जाना था।

बजट प्राइवेट स्कूलों की अखिल भारतीय संस्था नीसा (नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलाएंस) माननीय दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले के दौरान मैनेजमेंट कोटा की बहाली के आदेश का स्वागत करती है। ऐसा लगातार दूसरी बार है जब हाईकोर्ट ने दिल्ली के गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की स्वायतता पर मुहर लगाई है। दिल्ली सरकार को चाहिए कि अदालत के आदेशानुसार वह निजी स्कूलों को संविधान के अनुच्छेद 19(1)g के तहत प्राप्त मौलिक अधिकारों का सम्मान करे। सरकार से अनुरोध है कि वह निजी स्कूलों के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने की बजाए सरकारी स्कूलों में शिक्षण प्रशिक्