अविनाश चंद्रा's blog

बीते दिनों केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 10वीं कक्षा में बोर्ड की परीक्षा को पुनः अनिवार्य बनाने पर अपनी सहमति दे दी। इसके साथ ही राज्यों को पांचवी कक्षा के बाद परीक्षा कराने की भी दे दी गई। राजस्थान सहित कई राज्यों ने छठीं व आगे की कक्षा में परीक्षा कराने की गैर आधिकारिक घोषणा भी कर दी। 10वीं में बोर्ड की परीक्षा व छठीं तथा आगे की कक्षा में वार्षिक परीक्षा पद्धति वापस लाने के पीछे छात्रों द्वारा लापरवाही करने और पढ़ाई पर ध्यान न देने को प्रमुख वजह बताया गया है। इसे तर्कसंगत साबित करने के लिए राज्यों द्वारा तमाम सरकारी,

क्या आप जानते हैं?
भीषण प्रदूषण से प्रभावित एक देश ने लोगों को प्रदूषण फैलाने से रोकने की बजाए उन्हें पर्यावरण प्रदूषित करने का अधिकार देकर समस्या पर काबू पाया..
क्या आप जानते हैं?
लगातार विलुप्त होते जानवरों को बचाने के लिए एक देश ने लोगों को जानवरों को मारने की छूट दे दी। आज वे जानवर भारी तादात में उस देश में मौजूद हैं..
क्या आप जानते हैं?

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-  द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय लघु फिल्म प्रतिस्पर्धा ‘एडू-डॉक’ की हुई औपचारिक घोषणा, प्रविष्ठियां भेजने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर
- 3 दिसंबर को प्रतिष्ठित ‘स्कूल च्वाइस नेशनल कांफ्रेंस’ के दौरान इंडिया हैबिटेट सेंटर में होगी स्क्रीनिंग, 3 श्रेष्ठ फिल्में होंगी पुरस्कृत

- पॉलिसी रिव्यू कमेटी का गठन कर बजट प्राइवेट स्कूलों के समक्ष उत्पन्न होने वाली कई समस्याओं का करेंगे समाधान
- दिल्ली के निजी स्कूलों ने अव्यवहारिक ‘लैंड नॉर्म्स’ के कारण पैदा हुई समस्याओं से उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कराया था अवगत

बड़े व्यापारिक घराने उच्च मजदूरी दर (न्यूनतम मजदूरी की दर बढ़ाने) के लिए लॉबिंग करते हैं, ताकि छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस बढ़े भार को सहन न कर सकें और समाप्त हो जाएं.. इस प्रकार, बड़े प्रतिष्ठानों के राह से प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है..
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सहभागितापूर्ण लोकतंत्र के मूलमंत्र को आत्मसात करते हुए थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न संगठनों को एक मंच के नीचे लाकर 'एनईपी गठबंधन' तैयार किया है। गठबंधन का उद्देश्य नई शिक्षा नीति के बाबत व्यापक विचार विमर्श करना है। इस उद्देश्य को अमली जामा पहनाते हुए एनईपी गठबंधन द्वारा ऑनलाइन विचारमंच (विकी) www.nep.ccs.in लांच किया गया है। इस विचारमंच पर कोई भी आम-ओ-खास शिक्षा और शिक्षा के बाबत बनने वाली नीतियों पर अपने विचार प्रकट कर सकता है। इस विचारमंच को तैयार करते

जन्मदिन विशेषः "सही लोगों का चयन करना अच्छी बात है, लेकिन समस्याओं का समाधान इतने से ही नहीं होता। समस्याओं का समाधान गलत व्यक्ति के लिए सही कार्य करने को राजनैतिक ढंग से लाभकारी बनाने से होता है..: मिल्टन फ्रीडमैन"

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आजादी के पूर्व से ही देश में शिक्षा के प्रचार प्रसार में बजट प्राइवेट स्कूल्स अर्थात लो फी प्राइवेट स्कूल्स का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। समय समय पर इन स्कूलों से निकली विभूतियों ने व्यापार, खेल, राजनीति सहित तमाम क्षेत्रों में अपने झंडे गाड़े हैं। अफोर्डिब्लिटी और क्वालिटी एजुकेशन के कारण ही आज बजट प्राइवेट स्कूल्स सरकारी स्कूलों के विकल्प के रूप में उभरे हैं। न केवल नौकरी पेशा मध्यम वर्ग बल्कि मेहनत मजदूरी करने वाला निम्न आय वर्ग भी अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बीपीएस का रूख कर रहे हैं। इस बात की तस्दीक समय समय पर सरकारी और गैर

समाजवाद के 6 चमत्कार

1- किसी के पास काम नहीं, लेकिन कोई बेरोजगार नहीं
2- कोई काम नहीं करता, लेकिन पैसे सभी को मिलते हैं
3- पैसे सभी को मिलते हैं, लेकिन इस पैसे से खरीदने के लिए कुछ भी नहीं होता
4- कोई कुछ नहीं खरीद सकता, लेकिन सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है
5- सभी चीजों पर सबका स्वामित्व होता है, लेकिन कोई संतुष्ट नहीं होता
6- कोई संतुष्ट नहीं होता, लेकिन 99% लोग सिस्टम के लिए मतदान करते हैं

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सरकारों को कम से कम योजनाएं बनानी चाहिए। सरकारें जितनी अधिक योजनाएं बनाती हैं, लोगों के लिए व्यक्तिगत योजनाएं बनाने में उतनी अधिक परेशानी होती हैः एफ.ए. हायक (नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री)

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