आज़ादी.मी टीम's blog

उत्तर भारत के हिंदीभाषी राज्यों को आमतौर पर पिछड़ा मान लिया जाता है। सामाजिक विकास के तमाम पैमानों पर ये राज्य पिछड़े हुए हैं, चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या स्त्री-पुरुष बराबरी हो। जनसंख्या नियंत्रण के उद्देश्यों को पूरा करने में ये राज्य सबसे बड़ी बाधा हैं, दक्षिणी राज्यों ने औसतन 2.1 जन्म प्रति दंपति का लक्ष्य पा लिया है, यानी उनकी जनसंख्या लगभग स्थिर हो गई है। इसलिए जब ऐसे आंकड़े आते हैं, जिनसे पता चलता है कि इन राज्यों ने दक्षिणी राज्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है, तो यह सुखद लगता है।

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कांग्रेस ने इस बार गजब का दांव मारा है| यह दांव वैसा ही है, जैसा कि 1971 में इंदिराजी ने मारा था| गरीबी हटाओ! गरीबी हटी या नहीं, प्रतिपक्ष हट गया| 1967 में लड़खड़ाई कांग्रेस को 352 सीटें मिल गईं| इस बार बाबा रामदेव और अन्ना हजार के आंदोलनों ने सरकार की नींव हिला दी है| उसे इस समय सिर्फ दो ही तारणहार दिखाई पड़ रहे हैं| भोजन-सुरक्षा कानून याने भूख मिटाओ और अल्पसंख्यक आरक्षण याने मुसलमान पटाओ|

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पर्यावरण संबंधी तमाम अध्ययन देश में जल प्रदूषण के दिनोंदिन भयावह होते जाने के बारे में चेताते रहते हैं। अब सीएजी यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने भी इस बारे में आगाह किया है। पर्यावरणविदों की चेतावनियों की बराबर अनदेखी की गई है। इसलिए स्वाभाविक ही सवाल उठता है कि क्या सीएजी की इस रिपोर्ट को हमारी सरकारें गंभीरता से लेंगी! संसद में पेश सीएजी की ताजा रपट देश में जल प्रदूषण की भयावह स्थिति के लिए सरकार को फटकार लगाते हुए बताती है कि हमारे घरों में जिस पानी की आपूर्ति की जाती है, वह आमतौर पर प्रदूषित और कई बीमारियों को पैदा करने वाले जीवाणुओं से भरा होता है।

महातिर मोहम्मद अकेले नहीं हैं, जिन्हें लगता है कि भारत में ‘जरूरत से ज्यादा’ लोकतंत्र है। मलयेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री के इस बयान से आवाज मिलाते हुए केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने यह जरूरत बता दी है कि अब देश में अनियंत्रित लोकतंत्र को अपनाने का समय आ गया है।

ऐसा सोचने वालों को लगता है कि अगर लोकतंत्र पर लगाम कस दी जाए, तो फैसले लेना आसान हो जाएगा और विकास की राह में रुकावटें नहीं आएंगी। फिर जैसाकि महातिर ने कहा, भारत चीन की बराबरी कर सकता है।

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केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कपिल सिब्बल ने गूगल और फेसबुक जैसी इंटरनेट कंपनियों से कहा है कि वे अपनी साइट्स पर आपत्तिजनक सामग्री को जांचने और हटाने की व्यवस्था करें। कपिल सिब्बल ने संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में और कुछ धार्मिक नजरिये से आपत्तिजनक सामग्री के संदर्भ में यह बात कही। सरकार यह भी चाहती है कि आपत्तिजनक सामग्री को जांचने के लिए यांत्रिक या तकनीकी व्यवस्था न हो, बल्कि ऐसे लोग हों, जो यह निर्धारित करें।

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भारत में भ्रष्टाचार का बढ़ना न केवल एक बड़ी चिंता की बात, बल्कि एक ऎसा पक्ष है, जिस पर ज्यादातर भारतीयों को शर्म का अहसास हो रहा है। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट बता रही है कि भारत में पारदर्शिता और कम हो गई है। भारत वर्ष 2007 में 72वें स्थान पर था, लेकिन अब घटती पारदर्शिता की वजह से 95वें स्थान पर आ गया है।

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यदि खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी देने के फैसले के जरिये सरकार उस बनती धारणा को समाप्त करना चाह रही थी कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की दूसरे कार्यकाल में नीतिगत स्तर पर लकवाग्रस्त स्थिति है, तो सरकार मकसद में बुरी तरह नाकाम हुई। इसके बजाय संप्रग के नाराज सहयोगी दल आरोप लगा रहे हैं कि उनसे परामर्श नहीं किया गया, सत्तारूढ़ कांग्रेस में भी विरोधाभास के स्वर सुनाई पड़ रहे हैं और एकजुट विपक्ष संसद के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर सरकार को कमजोर करने पर आमादा है।

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पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम कोई नेता नहीं हैं कि वे किसी पार्टी या सरकार के पक्ष में बोलेंगे। उन्होंने कूडनकुलम के परमाणु-संयंत्र के पक्ष में अपनी राय देकर सारे विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। उस संयंत्र के विरूद्ध जो लोग प्रदर्शन कर रहे थे, उनमें से यद्यपि कई संदेहास्पद चरित्र के लोग भी थे लेकिन उस क्षेत्र के लोगों की चिंता स्वाभाविक ही थी। चेर्नोबिल और फुकुशिमा की दिल दहला देनेवाली दुर्घटनाओं ने सारे संसार को परमाणु-ऊर्जा के बारे में पुनर्विचार के लिए बाध्य कर दिया था। ऐसी स्थिति में हमारी सरकार भी हतप्रभ हो रही थी। उसकी जुबान हकला रही थी। इसी कारण 13 हजार करोड़ रू.

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कई सालों से भारतीय रेलवे को विश्व मानकों के अनुरूप ढालने का दम भरा जा रहा है। सुरक्षा संबंधी दावे भी बढ़-चढ़ कर किए जाते हैं। मगर हकीकत यह है कि आए दिन देश के किसी न किसी हिस्से में गाड़ियों की आपसी टक्कर, उनके पटरी से उतरने, आग लगने आदि घटनाएं हो जाती हैं। पिछले साढ़े सात महीनों में करीब इक्यासी रेल दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें तीन सौ से ऊपर लोगों को जान गंवानी पड़ी है। हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस में लगी आग इस सिलसिले की ताजा कड़ी है। इसमें सात लोग मारे गए। यह घटना रात के समय हुई, जब सारे मुसाफिर गहरी नींद में थे।

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चुनाव सुधारों पर छिड़ी राष्ट्रव्यापी बहस के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने लोकसभा व विधानसभाओं का कार्यकाल चार साल करने का सुझाव देकर नया सुर छेड़ दिया है। कुरैशी ने पांच साल के कार्यकाल को घटाकर चार साल करने के पीछे कोई व्यावहारिक तर्क पेश नहीं किया है।

देश में लंबे समय से चुनाव सुधारों को लेकर बहस चल रही है। मतदाताओं को 'राइट टु रिजेक्ट' या 'राइट टु रिकॉल' का अधिकार देने का मामला हो या अपराधी प्रवृत्ति के लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने का मामला हो या निर्धारित सीमा से अधिक धन खर्च करने वाले प्रत्याशियों को रोकने का मामला, बात बहस से आगे बढ़ ही नहीं पा रही। हर राजनीतिक दल साफ छवि के प्रत्याशियों को टिकट देने की बात तो करता है, लेकिन मौका जब टिकट बांटने का आता है, तो राजनीतिक दल साफ छवि की बजाय 'जिताऊ' उम्मीदवार पर दांव लगाने से नहीं चूकते।

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