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नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन ने दशकों पहले कहा था कि, अधिकांश समस्याओं की जड़ सरकारी फैसलों के उचित नीति की बजाए अच्छी नियत के आधार पर लिया जाना होता है। फ्रीडमैन का यह कथन अब भी अत्यंत प्रासंगिक है। उचित नीति की बजाए जब महज अच्छी नियत के आधार पर फैसले लिए जाते हैं तो अधिकांश लोगों के लिए वे परेशानी का सबब बनते हैं। अवैध बूचड़खानों पर प्रतिबंध के कारण उत्तर प्रदेश में ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गयी है। मांसाहारी खानों के शौकीन लोगों के साथ साथ जानवरों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है..। इस समस्या को अत्यंत हल्के फुल

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पिछले कुछ दशकों में प्राथमिक शिक्षा के सम्बन्ध में अभिभावकों की पसंद में अत्यधिक परिवर्तन हुआ है और कम साधनों के बावजूद ग्रामीण एवं उप-नगरीय क्षेत्रों में बजट प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती संख्या ने कम साधनों वाले माता-पिता को भी एक दूसरा विकल्प दिया है जिसकी लम्बे समय से आवश्यकता थी | इसके बाद भी इन स्कूलों के प्रति जो धारणा है वो अच्छी नहीं है और उनके ऊपर आरोप लगते रहते हैं की वे गुणवत्ता के स्थान पर अपने लाभ को अधिक प्राथमिकता देते हैं |

शिक्षक हूँ, पर ये मत सोचो,
बच्चों को सिखाने बैठा हूँ..
मैं डाक बनाने बैठा हूँ ,
मैं कहाँ पढ़ाने बैठा हूँ।
कक्षा में जाने से पहले
भोजन तैयार कराना है...
ईंधन का इंतजाम करना
फिर सब्जी लेने जाना है।
गेहूँ ,चावल, मिर्ची, धनिया
का हिसाब लगाने बैठा हूँ,
मैं कहाँ पढ़ाने बैठा हूँ ...
कितने एस.सी. कितने बी.सी.
कितने जनरल दाखिले हुए,
कितने आधार बने अब तक
कितनों के खाते खुले हुए
बस यहाँ कागजों में उलझा
निज साख बचाने बैठा हूँ

कानून बनाने का उद्देश्य क्या होता है और वास्तव में कानून क्या करता है, इस विषय को बेहद हल्के फुल्के किंतु सटीक ढंग से चित्रित किया है The Hindu अखबार के कार्टूनिस्ट सुरेंद्र ने.. अवश्य देखें और अपनी प्रतिक्रिया दें...
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सुनो सुनो... विधायक जी कह रहे हैं कि ये ही मिल कर मुख्यमंत्री चुनते हैं

 

साभारः काजल कुमार

 

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जनसंख्या को सभी समस्याओं का कारण मानने और चीन जैसी कड़ी नीति का मांग करने वाले लोगों को यह खबर अवश्य पढ़नी चाहिए.. http://bit.ly/2mD5QI9 बाद में एक बार http://azadi.me/population_boon_not_bane इसे भी पढ़ना चाहिए...
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स्कूलों से संबंधित नीतियों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान अनऐडेड बजट स्कूलों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की मांग को लेकर बजट स्कूल एसोसिएशनों के अखिल भारतीय संगठन 'नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस' (निसा) का एक प्रतिनिधिमंडल बृहस्पतिवार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय पहुंचा। निसा प्रेसिडेंट कुलभूषण शर्मा के नेतृत्व में मानव संसाधन मंत्रालय पहुंचे बजट स्कूल एसोसिएशनों के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने सेक्रेटरी, डिपार्टमेंट ऑफ स्कूल एजुकेशन एंड लिटरेसी; अनिल स्वरूप से मुलाकात की और समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान स्कूलों की ऑटो

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