संपादकीय कोना - अविनाश

अविनाश चंद्रा

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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने एक बार फिर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति तैयार करने की कवायद शुरू कर दी है। जून के अंतिम सप्ताह में इस संबंध में नौ सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया। जाने माने वैज्ञानिक व 1994 से 2003 तक इंडियन स्पेश रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (इसरो) के चेयरमैन रहे पद्मश्री व पद्म विभूषण के. कस्तूरीरंगन को समिति की अध्यक्षता सौंपी गई है। एसएनडीटी यूनिवर्सिटी, मुंबई की पूर्व कुलपति डा. वसुधा कामत, केरल के दो जिलों को सौ फीसदी साक्षर बनाने में महती भूमिका निभाने वाले पूर्व आईएएस

Published on 30 Jun 2017 - 20:08

भारत दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्रों में से एक है जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था का उद्देश्य सुशासन के लिए काम करना होता है। वह सुशासन जो प्रमुख रूप से आठ अव्यवों से मिलकर
तैयार होता है। ये अव्यव हैंः
विधि का शासन अर्थात rule of law
समानता एवं समावेशन अर्थात equity and inclusiveness
भागीदारी अर्थात participation
अनुक्रियता अर्थात responsiveness
बहुमत या मतैक्यता अर्थात consensus oriented
प्रभावशीलता व दक्षता अर्थात effectiveness and efficiency

Published on 9 Jun 2017 - 19:05

उदारवादः

उदारवाद शब्द का मूल आज़ादी या स्वतंत्रता है। दूसरे शब्दों में यहां केंद्र बिंदू व्यक्ति है। समाज व्यक्ति की मदद के लिए है और न कि व्यक्ति समाज के लिए जैसा कि साम्यवाद या समाजवाद जैसी व्यवस्थाएं परिभाषित करने की कोशिश करती हैं। उदारवाद के मूल तत्व व्यापक हैं और जीवन के हर पहलू को छूते हैं। जहां तक मनोभाव की बात है तो सहनशीलता, खासतौर पर असहमति को लेकर, ही इसका आधार है। मामला चाहे धार्मिक हो, सांप्रदायिक, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय या फिर जाति या भाषाई समूह से ताल्लुक रखता हो,

Published on 27 May 2017 - 12:41

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