स्वामीनॉमिक्स: मानव संसाधन मंत्री के नाम खुला पत्र

प्रिय श्री कपिल सिब्बल आपसे देश को मानव संसाधन मंत्री के रूप में काफी उम्मीदें हैं। शिक्षा जगत में सुधार के प्रति आपकी प्रतिबद्धता, उच्च शिक्षा में बदलाव और विदेशी विश्वविद्यालयों के देश में आसान प्रवेश से हममें काफी आशाएं जगी हैं। वैसे शिक्षा जगत में व्यापक सुधार की दृष्टि से हमें गरीबों और ऐतिहासिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए प्राथमिक शिक्षा में सुधार की कोशिश करनी चाहिए। गरीब लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूल भेजते हैं, लेकिन उन्हें वहां शिक्षा बमुश्किल ही मिल पाती है। ट्रेड यूनियन की मजबूत पकड़ की वजह से लापरवाह शिक्षकों के प्रति कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। राज्यों की तरफ से किसी मुख्यमंत्री ने इन पर काबू पाने के प्रयास नहीं किए। धनी छात्र तो फिर भी निजी स्कूलों और ट्यूशन के सहारे पढ़ाई पूरी कर लेते हैं , लेकिन गरीब परिवारों के छात्रों के लिए यह संभव नहीं हो पाता और वे स्कूल के बाद की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। इससे शिक्षा पर किया जा रहा लाखों करोड़ का खर्च बेकार साबित हो रहा है। स्कूल वाउचर इस दिशा में एक सही कदम साबित हो सकता है। अभिभावकों को प्रति बच्चे के हिसाब से स्कूल वाउचर के रूप में मदद दी जा सकती है , जिसे किसी सरकारी या निजी स्कूल में पढ़ाई संबंधित काम के लिए ही भुनाया जा सके। इस वाउचर से गरीब परिवारों को स्कूल का चयन करने में वैसी ही सुविधा मिलेगी, जैसी उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत वोट देने के अधिकार के मामले में मिली है। जिस तरह निजी एयरलाइंस और बैंकों से मिल रही कड़ी प्रतियोगिता से सरकारी क्षेत्र ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया है, उसी तरह निजी क्षेत्र के स्कूलों से प्रतियोगिता कर सरकारी स्कूल बेहतर बनेंगे। शिक्षकों का संगठन प्रतियोगिता करने या जिम्मेदारी उठाने से बचता रहा है और स्कूल वाउचर का विरोध करता है। वे आरोप लगाते हैं कि पश्चिमी देशों में स्कूल वाउचर का मिश्रित असर देखा गया है। अमेरिका के कुछ प्रांतों में वाउचर इस्तेमाल करने वाले छात्रों के प्रदर्शन में सरकारी स्कूल के बच्चों की तुलना में कोई सुधार नहीं देखा गया है। दूसरी तरफ स्वीडन में वाउचर इस्तेमाल करने वाले बच्चों ने गजब का प्रदर्शन किया है।
स्वामीनाथन अय्यर

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