आजीविका का ध्यान
किसानों व मछुआरों के आंदोलन के चलते सरकार पूर्व मेदिनीपुर जिले के हरिपुर इलाके में प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र निर्माण के फैसले से पीछे हट गई। इससे स्थानीय लोग खुश हैं। पूर्व वामो सरकार इस परियोजना को अपनी उपलब्धि बताती थी, और कहती थी कि इससे बंगाल को विद्युत में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। जिस समय यह घोषणा हुई थी, उस समय तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी नंदीग्राम कांड को लेकर आंदोलन कर रही थीं।
किसानों के हित में उन्होंने आश्वासन दिया था कि अगर उनकी सरकार बनेगी, तो पूर्ववर्ती घोषणा को समाप्त कर दूंगी। मौका मिलते ही उन्होंने ऐसा ही किया। एक ढंग से ममता ने चुनावी वादे को ही पूरा किया। हालांकि यह निर्णय केंद्र का था, जिस पर वामो सरकार ने मुहर लगाई थी। दरअसल, यहां पर्यावरण पर खतरा उत्पन्न होने की आशंका थी, जिससे लोग भयभीत थे। कई बार केंद्रीय दल ने क्षेत्र का दौरा किया, और अलग अलग किसानों व मछुआरों से बात की। परमाणु संयंत्र की प्रक्रिया शुरू करने के लिए हरी झंडी भी मिली, पर विरोध के चलते ही काम शुरू नहीं हो सका।
ममता ने किसानों व मछुआरों के पक्ष का अपना समर्थन किया, जो यह दर्शाता है कि उन्होंने मां माटी व मानुष की सरकार होने का वादा पूरा किया। यह सही है कि अभी बंगाल को जितनी विद्युत चाहिए, उस हिसाब से आपूर्ति नहीं हो रही है। उर्जा मंत्री मनीष गुप्ता भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि बंगाल को लगभग 6500 मेगावाट विद्युत चाहिए, लेकिन सरकार अपने बलबूते 5525 मेगावाट की व्यवस्था कर रही है। पावर ग्रिड कार्पोरेशन की मदद से जरूरत के हिसाब से बिजली खरीदी जा रही है। कुछ कंपनियां भी निजी तौर पर आपूर्ति करती हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य चाहते थे कि परमाणु उर्जा केंद्र शुरू होने पर बंगाल आत्मनिर्भर होगा। किंतु, ममता ने इसे मानवीय पक्ष से जोड़कर चुनाव में स्थानीय लोगों का जन समर्थन प्राप्त किया। यदि सरकार ऐसा नहीं करती तो उनके खिलाफ माहौल भी बन सकता था। स्थानीय तृणमूल सांसद शुभेन्दू अधिकारी ने भी लोकसभा में यह मामला उठाया था, और कहा था कि परमाणु उर्जा संयंत्र निर्माण के फैसले को रद करे। उस समय कुछ पर्यावरणविदों ने भी आपत्ति जताई थी, और कहा था कि विदेशी कंपनियां अपने देश को सुरक्षित रखकर विकासशील देश में यह संयंत्र लगा रहे हैं, ताकि भविष्य में कोई गड़बड़ी हो तो उससे वे पूरी तरह सुरक्षित बच जाएं। ऐसे में यह सोचना केंद्र सरकार का काम है कि वह कोई इस तरह का काम नहीं करे, जिससे खतरा पैदा हो।
- अनिल कुमार
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