स्वतंत्र पार्टीः भारत की पहली उदारवादी पार्टी

चक्रवर्ती राजागोपालाचारी (राजाजी) द्वारा सन् 1959 में स्थापित स्वतंत्र पार्टी राष्ट्रीय स्तर की उदारवादी पार्टी थी। पार्टी ने कांग्रेस सरकार की समाजवादी नीतियों को पुरजोर विरोध किया था। पार्टी बाजार आधारित अर्थव्यवस्था की पक्षधर थी और लाइसेंस राज के समापन की वकालत करती थी। स्वतंत्र पार्टी का उदय; इस मद्देनज़र अभूतपूर्व था क्योंकि यह एकमात्र सांगठनिक प्रतिष्ठान था जो व्यवस्था पर प्रश्न उठाता था और सर्वशक्तिशाली तकनीकि राज्य के विचार से स्पष्ट रूप से असहमति जताता था। 1962 के पहले आम चुनावों के दौरान पार्टी ने 18 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की और चार राज्यों; बिहार, ओडिशा, राजस्थान और गुजरात विधानसभा में कांग्रेस की मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी। तत्पश्चात 1967 के चुनावों में इसने लोकसभा की 44 सीटों पर विजय पताका फहराया और कांग्रेस के मुख्य विपक्षी पार्टी। हालांकि, 1971 में महागठबंधन के गठन के बाद इसका प्रभाव कम हो गया और इसे मात्र 8 सीटों पर ही जीत मिली। 1972 में पार्टी को एक और झटका लगा, इसके संस्थापक नेता राजाजी नहीं रहें। परिणामस्वरूप, 1974 में भारतीय क्रांति दल में विलय के साथ स्वतंत्र पार्टी का सूर्य दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से अस्त हो गया

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