स्कूलों को नहीं, बच्चों को सीधे कैश ट्रांसफर करे सरकार

भास्कर खासः नई शिक्षा नीति के लिए सुझाव व सिफारिशें, शिक्षा व्यवस्था का थर्ड पार्टी करे मूल्यांकन

* नियमन नतीजों के आधार पर हो, प्रिंसिपलों को मिले स्वायत्तता

 

सरकार शिक्षा के लिए फंड स्कूल व संस्थाओं को न देकर सीधे छात्रों को दे। छात्रों को यह फंड एजुकेशन वाउचर, डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर, एजुकेशन क्रेडिट एकाउंट या स्कॉलरशिप के रूप में दिए जा सकते हैं। इससे छात्रों को स्कूल च्वाइस का हक मिलेगा कि यदि किसी स्कूल की पढ़ाई पसंद नहीं आ रही है तो माता-पिता बच्चे काक स्कूल भी बदल सकेंगे।

 

शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नई शिक्षा नीति बनाने की दिशा में सरकार इन दिनों जन परामर्श कर रही है। सुझाव व प्रस्ताव मांगे गए हैं। ऐसे में सरकार के पास बिल्कुल नायाब सिफारिशें आ रही हैं। सेंटर फॉर सिविल सोसायटी (सीसीएस) ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय व देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षा विभागों को नई शिक्षा नीति के लिए अपनी सिफारिशें भेजी हैं।

 

सीसीएस के मुखिया पार्थ शाह कहते हैं कि सरकार अपने बजट में शिक्षा के लिए प्रति छात्र के हिसाब से फंड का प्रावधान करती है जबकि उसका आवंटन संस्थाओं व स्कूलों को किया जाता है। जबकि हमारी संस्था ने राजधानी के कई इलाकों में कई हजार बच्चों पर वाउचर के जरिए पढ़ाई करने का पायलट प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक चलाया, इसके बेहतर नतीजे निकले। हेल्थ चेकअप की तरह समूची शिक्षा व्यवस्था का थर्ड पार्टी मूल्यांकन होना चाहिए। इससे यह पता चल सकेगा कि व्यवस्था में क्या फैक्टर प्रदर्शन को बेहतर बना रहे हैं और कौन से फैक्टर बेकार हैं। उनका सुझाव है कि नेशनल एचीवमेंट सर्वे का दायरा बढ़ाकर थर्ड पार्टी मूल्यांकन के लिए उसमें हर स्कूल व हर छात्र को शामिल किया जाए।

 

कोई फैसला लेने में फिलहाल प्रिंसिपल के हक सीमित हैं। सरकारी व्यवस्था में स्कूल की जरूरी बातों के लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी होती है। प्रिंसिपल को अधिक अधिकार मिलने से स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण सुधार आ सकते हैं।

-------------------------------------------

परिणाम के आधार पर हो नियमन

फिलहाल नियमन का जोर बुनियादी ढांचे, शिक्षकों के वेतन, केंद्र व राज्य सरकारों के विभिन्न मानकों को पूरा करने पर होता है। इन बातों का बच्चों के सीखने के नतीजे से बहुत कम वास्ता होता है। वैश्विक शोधों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकार की खर्च से बच्चे के सीखने के नतीजे पर खास फर्क नहीं पड़ता। सिफारिश की गई है कि स्कूलों के नियमन के लिए परिणाम को की-फैक्टर माना जाए। हालांकि अंतिम परिणाण को मुख्य कारक मानने का यह मतलब भी नहीं की बाकी कारक बेमानी हैं।

-----------------------------------------

शिक्षा के आंकड़े हों सार्वजनिक

हर राज्य में मैनेजमेंट इंफॉर्मेंशन सिस्टम बने और हर स्कूल में नामांकन, बुनियादी ढांचा और परिणाम तक हर तरह का नवीनतम आंकड़ा हर वक्त वेबसाईट पर उपलब्ध हो। आंकड़ों का सत्यापन सैंपल सर्वे, निरीक्षण, सामुदायिक निगरानी, स्कूल ऑडिट में अभिभावकों की सहभागिता से हो सके।

-----------------------------------------------

मुनाफा या गैर मुनाफा स्कूल खोलने का मिले विकल्प

देश में स्कूल का गैर मुनाफा होना आवश्यक है। जबकि अधिकांश राज्यों में बिजली, पानी के बिल स्कूलों से कमर्शियल दरों पर लिए जाते हैं। जबकि स्वास्थ्य, टेलीकॉम और बिजली के क्षेत्र में मुनाफा कमाने वाली कंपनियां पहुंच व गुणवत्ता दोनों तरह से जनता को लाभान्वित कर रही हैं। विचार सभी स्कूलों को मुनाफा कमाने वाली संस्था बनाने का नहीं बल्कि उनके पास एक विकल्प जरूर हो।

 

- अनिरुद्ध शर्मा

साभारः दैनिक भास्कर 

Add new comment

Filtered HTML

  • Lines and paragraphs break automatically.
  • Allowed HTML tags: <a> <em> <strong> <cite> <blockquote> <code> <ul> <ol> <li> <dl> <dt> <dd>
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.

Plain text

  • No HTML tags allowed.
  • Web page addresses and e-mail addresses turn into links automatically.
  • Lines and paragraphs break automatically.